
वाराणसी। पिता की नगरी में पुत्र की पूजा की जा रही है। जहाँ विभिन्न स्थानों पर गणेश मन्दिर में भक्तों ने दर्शन पूजन किया। आज के दिन मातायें अपनी संतान की खुशहाली के लिए व्रत रहने के साथ ही गजानन के विग्रहो की का विधिपूर्वक पूजन अर्चन करते है , गणेश मंदिरों में आज भक्तो की भारी भीड़ है महिलाओ ने भगवान लम्बोदर का न केवल पूजन किया बल्कि अपने संतान सहित परिवार के खुशहाली की कामना की जा रही है।
चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है धार्मिक गर्न्थो के अनुसार सूर्योदय के बाद स्नानादि से निवृत होकर सोना , ताम्बा , चांदी ,मिटटी या गोवर से गणेश की मूर्ति बनाकर उसकी पूजा करने का विधान है इनके अभाव में किसी भी गणेश मंदिर में जाकर इक्कीस लड्डू का भोग लगाने के साथ हो इतना ही दुर्बा गजानन को चढ़ाना चाहिए
बात इस लोक पर्व से जुडी कथा की करे तो भगवान शंकर स्नान करने भोगावती गये , पार्वती जी भी अपने शरीर के मैल से पुतला बनाकर उसमे जान डाल गणेश नाम देकर ये आदेश दिया की उनके स्नान के दौरान कोई पुरुष अंदर न आये ….स्नान करने के बाद जब भगवान् शंकर वापस आये तो दरवाजे पर बैठे बालक गणेश ने अंदर जाने से रोका युद्ध के बाद क्रुद्ध शिव ने बालक का सर काट दिया और अंदर चले गये जब यह बात पार्वती को पता चला तो वो विचलित हो गयी ….पार्वती के मानसपुत्र गणेश को जीवित करने के लिए शंकर जी ने हाथी का सर लगा कर जीवित कर दिये ….कहा जाता है की यही से गणेश चतुर्थी ब्रत का शुरुआत के कारण रहे ।
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