कौन धारा.. किसी भी व्यक्ति को टीका लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता

कौन धारा.. किसी भी व्यक्ति को टीका लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता



सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी भी व्यक्ति को टीका लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव के नेतृत्व वाली पीठ ने वैक्सीन ट्रायल के आंकड़ों का खुलासा करने और देश के विभिन्न हिस्सों में अधिकारियों की ओर से जारी “वैक्सीन मैंडेट” पर रोक लगाने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “कोर्ट के सामने जो तथ्‍य पेश किए गए हैं, उनके आधार अदालत टीकाकरण के लाभों पर विशेषज्ञों के लगभग सर्वसम्मत विचारों को दर्शाती है … यह अदालत संतुष्ट है कि भारत की वर्तमान टीकाकरण नीति को प्रासंगिक है और गैरजरूरी नहीं कहा जा सकता है।

  • जनवरी में दाखिल हलफनामे में केंद्र साफ कर चुका है रुख
  • केंद्र सरकार ने 17 जनवरी 2022 को कोरोना वैक्सीनेशन पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था। केंद्र ने अपने हलफनामा में कहा था कि देशभर में कोरोना वैक्सीनेशन अनिवार्य नहीं है और न ही किसी पर वैक्सीन लगवाने का कोई दबाव है।

    क्‍या है अनुच्‍छेद 21
    संविधान के अनुच्छेद 21 में कहा गया है कि “कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा।” मतलब अनुच्छेद 21 इन दोनों अधिकारों की सुरक्षा प्रदान करता है। अनुच्‍छेद 21 को भारत सरकार के अधिनियम 1935 में अनुच्‍छेद 21 का प्रावधान किया गया है। यह सुनिश्वित करता है कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा। अनुच्छेद 21 भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत आता है और भारत के सभी नागरिकों को दिए जाने वाले मौलिक अधिकारों में से है।


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