महिलायों सहित और कौन कर सकता हैं श्राद्ध…. अवश्य पढ़िए, श्राद्ध पर शास्त्र का मत

महिलायों सहित और कौन कर सकता हैं श्राद्ध…. अवश्य पढ़िए, श्राद्ध पर शास्त्र का मत

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श्राद्ध विधि स्वयं करनी चाहिए परंतु स्वयं करना नहीं आता हो तो ब्राह्मण को बुलाकर करवाना चाहिए। आजकल श्राद्ध करने वाले शुद्ध ब्राह्मण भी मिलना कठिन हो गया है। इस पर उपाय के रूप में श्राद्ध संकल्प विधि पुस्तक मिलती है उसको लाकर प्रत्येक व्यक्ति ने श्राद्ध संकल्प विधि का पाठ करना चाहिए। श्राद्ध विधि स्वयं करना प्रत्येक को सम्भव है। ऐसे लोगों ब्राह्मण या ब्राह्मण ना मिलने पर किसी जानकार द्वारा भी श्राद्ध विधि करवा सकते हैं क्योंकि श्राद्ध विधि होना यह आवश्यक है ।

श्राद्ध पक्ष आदि पितरों के लिए की जाने वाली विधि लड़के ने करना आवश्यक है ?-
पूर्वजों के स्पंदन और उन के सबसे निकट के वारिस के स्पंदनों में काफी समानता होती है । यदि सूक्ष्म देह वेदना का अनुभव कर रहा हो तो उसके कष्ट के स्पंदन उस के सबसे करीब के वारिस को भी अनुभव में आते हैं। इसी कारण से श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए की जाने वाली विधि लड़के को करना चाहिए। लड़के के स्पंदन और पितरों के स्पंदन एक जैसे होने के कारण श्राद्ध तर्पण के समय लड़के द्वारा दिए हुए तर्पण को पितरों को ग्रहण करना सरल होता है।

स्त्रियों द्वारा भी किया जा सकता हैं श्राद्ध –
लड़की,पत्नी, मां और बहू इनको भी श्राद्ध करने का अधिकार है । ऐसा होने पर भी कई पंडित स्त्रियों को श्राद्ध करने की सहमति नहीं देते हैं। इसका कारण यह है कि पूर्व समय में स्त्रियों का जनेऊ संस्कार होता था परंतु आजकल यह संस्कार सभी जगह बंद हो जाने के कारण श्राद्ध स्त्रियों के द्वारा करना यह भी बंद हो गया है परंतु आपातकाल में श्राद्ध करने के लिए कोई भी उपलब्ध ना होने पर श्राद्ध न करने की अपेक्षा स्त्रियों ने करना चाहिए ।

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गलत हैं कि श्राद्ध अमुक व्यक्ति नहीं कर सकता..
लड़का, लड़की, पोता, परपोता, पत्नी, संपत्ति में हिस्सा प्राप्त करने वाला लड़की का लड़का, सगा भाई, भतीजा, चचेरे भाई का लड़का, पिता, मां, बहू, बडी और छोटी बहन के लड़के, मामा ,सपिंड (सात पीढ़ी तक के कुल के कोई भी), समानोदक (सात पीढ़ी के बाद के गोत्र के कोई भी) शिष्य, उपाध्याय, मित्र, दामाद क्रम से पहला ना हो तो दूसरा भी श्राद्ध कर सकते हैं। संयुक्त परिवार में उत्तर दायित्व निभाए हुए व्यक्ति ने श्राद्ध करना चाहिए । और विभक्त होने पर प्रत्येक द्वारा स्वतंत्र श्राद्ध करना चाहिए । प्रत्येक मृत व्यक्ति के लिए श्राद्ध किया जाए और उसे सद्गति मिले ऐसी हिंदू धर्म में सिद्धता की गई है । यदि किसी मृत व्यक्ति का कोई भी ना हो तो उसका श्राद्ध करने का कर्तव्य राजा और पुरोहित और ब्रम्हाण का होता है ऐसा धर्मसिंधु ग्रंथ में उल्लेख किया गया है ।

श्राद्ध करने में अड़चन आने पर उसे दूर करने का मार्ग :

▪️योग्य ब्राह्मण ना मिलने पर जो ब्राह्मण मिले उनसे ही श्राद्ध करवा कर लेना चाहिए ।
▪️मां के श्राद्ध में यदि ब्राह्मण ना मिले तो सुहागिन को बताकर श्राद्ध करना चाहिए ।
▪️अनेक ब्राह्मण ना मिलने पर एक ब्राह्मण को पितरों के स्थान पर बैठाकर और देवस्थान पर शालिग्राम रखकर संकल्प करके श्राद्ध करना चाहिए और वह भोजन गाय को खिला देना चाहिए या फिर नदी, तालाब या कुएं में विसर्जित करना चाहिए ।
▪️राजकार्य, कारागृह में, बीमारी या अन्य कारणों से श्राद्ध करने में असमर्थ होने पर पुत्र, शिष्य, ब्राह्मण के द्वारा श्राद्ध करवाना चाहिए ।
▪️संकल्प विधि करना, अर्थात पिंडदान के बिना बाकी सब विधि करना ।
▪️ब्रह्मार्पण विधि करना, अर्थात ब्राह्मण को बुलाकर हाथ पैर धुलाकर आसन पर बिठाकर पंचोपचार पूजा करके भोजन करवाना चाहिए ।
▪️होम श्राद्ध करना, अर्थात धन और ब्राह्मण के अभाव में अन्न पकाकर ‘उदीरतामवर’ इस सूक्त की प्रत्येक ऋचा बोलकर होम करना चाहिए ।

उपरोक्त कुछ भी करने में असमर्थ होने पर आगे दिए अनुसार श्राद्ध करना चाहिए :

▪️अन्न भरकर घड़ा देना ।
▪️थोड़ा अन्न देना ।
▪️तिल देना ।
▪️थोड़ी दक्षिणा देना ।
▪️यथाशक्ति अनाज देना ।
▪️गाय को घास खिलाना ।
▪️विधि इत्यादि कुछ भी ना करते हुए केवल पिंड देना ।
▪️स्नान करके तिल युक्त पानी से पितृ तर्पण करना ।
▪️श्राद्ध की तिथि के दिन उपवास करना ।
▪️श्राद्ध के दिन श्राद्ध विधि पढ़ना ।

ऊपर बताएं विधि के अनुसार करने में असमर्थ होने पर आगे बताए अनुसार श्राद्ध करना चाहिए :

▪️जंगल में जाकर दोनों हाथ ऊपर करके सूर्य आदि लोकपाल को घास का तिनका दिखा कर यह कहना चाहिए मेरे पास श्राद्ध करने के लिए धन-संपत्ति इत्यादि कुछ भी नहीं है मैं सर्व पितरों को नमस्कार करता हूं। मेरी भक्ति से मेरे सभी पितर तृप्त हो । मैंने अपने हाथों को ऊपर किया है ।
▪️मनुष्य रहित जंगल में जाकर हाथ ऊपर करके ऊँची आवाज में कहना चाहिए मैं निर्धन और अन्न रहित हूं मुझे पितृ ऋण से मुक्त कीजिए।
▪️दक्षिण की ओर मुंह करके रोना चाहिए ।
इस प्रकार इन सभी प्रकारों में से हर वर्ष श्राद्ध के दिन पितरों को स्मरण करके किसी भी प्रकार से श्राद्ध करना चाहिए । श्राद्ध किए बिना नहीं रहना चाहिए ।


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