कामिल बुल्के का स्मरण करना पुण्य कार्य डा. जितेन्द्र नाथ मिश्र

कामिल बुल्के का स्मरण करना पुण्य कार्य डा. जितेन्द्र नाथ मिश्र



– अग्निहोत्री बंधु मे भजनों से किया सभी को सराबोर  
– पराड़कर भवन में जन्मदिवस पर किया गया नमन

वाराणसी। देश में हिंदी में सबसे पहला शोध प्रबंध प्रस्तुत करने वाले व रामकथा पर उपलब्ध समस्त साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन करने वाले पद्मभूषण फार कामिल बुल्के को उनके जन्म दिवस पर याद किया गया | अयोध्या शोध संस्थान की ओर से नादरंग ! पत्रिका के सहयोग से बुधवार को अपराहन गोलघर स्थित पराड़कर स्मृति भवन के गर्दै सभागार में कामिल बुल्के के जन्मदिवस पर ‘स्मरण ‘ का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर लखनऊ से पधारे प्रसिद्ध गायक अग्निहोत्री बंधु ने भजनों की प्रस्तुति कर सभी को सराबोर किया। बतौर मुख्य अतिथि डॉक्टर जितेंद्र मिश्र ने कहा कि कामिल शब्द का अर्थ सुगंध होता है। उनकी सुगंध पूरे संसार में फैली हुई है।वह भारत के लिए ही बने थे। हम भारतीयों के लिए वह बाबा थे। फादर जैसे हम भारतीय हो जाए तो हम धन्य हो जाएंगे विशिष्ठ अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रोफेसर राजकुमार ने कुछ सस्मरण  सुनाएं कहा कि कामिल बुल्के की जो भी पुस्तकें हैं उनके संग्रहित करना चाहिए उनकी परंपराओं को हमें आगे ले जाना होगा। उदय प्रताप महाविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर राम सुधार सिंह ने कहा की  कुछ संस्मरण सूचनाएं  एक बार कामिल बुल्के से मिलने का सौभाग्य मिला वह विनय पत्रिका पर काम करना चाहते थे। वह मन से भारतीय हो गए थे वह हिंदी के अन्नय साधक थे उनसे सीखने की जरूरत है।
कार्यक्रम में अग्निहोत्री बंधुने भजनो की शुरुआत रामचरित मानस के बालकांड के मंगलाचरण से की। तत्पश्चात ‘राम राम गाओ संतों, उत्तरकांड का ‘नमामि शमी शान निर्वाण रूपं तत्पश्चात कृष्ण भजन रे मन कृष्ण नाम कही लीजे तथा हनुमान चालीसा के संपादित अंश सुना कर सभी को भाव विभोर कर दिया। उनके साथ प्रतीक समद्दार (तबला) प्रखर सिंह परिहार (ढोलक) व आफताब आलम (की बोर्ड) पर संगत कर रहे थे। अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम संयोजक वरिष्ठ पत्रकार आलोक पराड़कर ने किया। कार्यक्रम में काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुभाष सिंह महामंत्री डॉक्टर अत्रि भारद्वाज, काशी पत्रकार संघ मंत्री राधेश्याम कमल, नरेन्द्रनाथ मिश्र, डा.मधुमिता, पवन कुमार शास्त्री, डा.स्वर वंदना, अनूप अग्रवाल, कुमार विजय, अशोक बल्लभ दास, आशीष नंदी समेत काफी लोग मौजूद थे। संचालक और स्वागत वरिष्ठ पत्रकार आलोक पराड़कर ने किया। इस मौके पर कामिल बुल्के पर चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। 



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