
गणपति जी ( ganapati ) को प्रथम पूज्य देवता हैं लिहाजा हर शुभ कार्य में सबसे पहले उन्हें पूजित किया जाता है। शास्त्रों में बुधवार का दिन भगवान गणेश ( ganesh) को समर्पित है। गणेश जी को विघ्नहर्ता भी है जो सारे दुखों और कष्टों को हरते ।
गणेश चतुर्थी मुहूर्त
चतुर्थी तिथि 21 जनवरी को सुबह 7.26 बजे से लेकर 22 जनवरी शनिवार की सुबह 7.24 बजे तक रहेगी। वहीं, चंद्रोदय रात 8.39 बजे होगा। चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय काल मिलने के माताएं आज यानि 21 जनवरी शुक्रवार को व्रत रखेंगी। आज के दिन ही भगवान गणेश को हाथी का मस्तक लगाया गया था।
श्रीगणेश को क्यों कहा जाता है गणपति
कहा जाता है कि बालक को सभी देवताओं ने कई वरदान दिए। सभी गणों का स्वामी होने के कारण भगवान गणेश को गणपति कहा जाता है। गज (हाथी) का सिर होने के कारण इन्हें गजानन कहते हैं ।
भगवान गणेश की जन्म कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार नंदी से माता पार्वती की किसी आज्ञा के पालन में ऋुटि हो गई। जिसके बाद माता से सोचा कि कुछ ऐसा बनाना चाहिए, जो केवल उनकी आज्ञा का पालन करें। ऐसे में उन्होंने अपने उबटन से एक बालक की आकृति बनाकर उसमें प्राण डाल दिए। कहते हैं कि जब माता पार्वती स्नान कर रही थीं तो उन्होंने बालक को बाहर पहरा देने के लिए कहा था । माता पार्वती ने बालक को आदेश दिया था कि उनकी इजाजत के बिना किसी को अंदर नहीं आने दिया जाए। कहते हैं कि भगवान शिव के गण आए तो बालक ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद स्वयं भगवान शिव आए तो बालक ने उन्हें भी अंदर नहीं जाने दिया। इस बात से भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया। माता पार्वती जब बाहर आईं तो वह यह सब देखकर क्रोधित हुईं ।उन्होंने उनके बालक को जीवित करने के लिए कहा तब भगवान शिव ने एक हाथी का सिर बालक के धड़ से जोड़ दिया।
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