आखिर कैसे ‘जन गण मन’ बना भारत का राष्ट्रगान

आखिर कैसे ‘जन गण मन’ बना भारत का राष्ट्रगान

भारत इस बार अपना 74 वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। इस दिन ही भारत का संविधान लागू हुआ था और इस दिन राष्ट्रगान भी गाया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि संविधान सभा ने ‘जन-गण-मन’ को भारत के राष्ट्रगान के रूप में 24 जनवरी 1950 को अपनाया था।

कैसे ‘जन गण मन’ बना भारत का राष्ट्रगान?

पहली बार 27 दिसंबर साल 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता सत्र में राष्ट्रगान गाया गया था। जन गण मन को आधिकारिक रूप से 24 जनवरी साल 1950 को भारतीय राष्ट्रगान के रूप में संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था।

जन गण मन के हिंदी संस्करण को भारतीय संविधान सभी द्वारा 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकृति प्रदान की गई। भारत के राष्ट्रगान में मुख्य रूप से 7 राज्यों का उल्लेख किया गया है। पंजाब, सिंधु , गुजरात, मराठा, द्राविड़ यानी दक्षिण भारत, उत्कल यानी कलिंग और बंग यानी बंगाल का उल्लेख है।

किस भाषा में लिखा गया?

इसे 1911 में मूल रूप से बांग्ला भाषा में लिखा गया था। फिर इसके हिंदी संस्करण को संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया था। नोबेल पुरस्कार विजेता रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखे गये ‘जन गण मन’ को भारत के राष्ट्रगान के रूप में साल 1950 को अपनाया गया था।

भारत के राष्ट्रगान की पंक्तियां रवींद्रनाथ टैगोर के गीत ‘भारतो भाग्य बिधाता’ से ली गई हैं। आपको बता दें कि 28 फरवरी साल 1919 को टैगोर ने पूरे बंगाली गीत की एक अंग्रेजी व्याख्या लिखी और इसका शीर्षक ‘द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया’ रखा।

24 जनवरी 1950 को टैगोर के ‘भारतो भाग्य बिधाता’ के पहले छंद को आधिकारिक तौर पर भारत की संविधान सभा द्वारा भारत के राष्ट्रगान के रूप में घोषित किया गया था।

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