आखिर क्यों घर की नई दुल्हन नहीं देखती ससुराल की पहली होली?

आखिर क्यों घर की नई दुल्हन नहीं देखती ससुराल की पहली होली?


8 मार्च, दिन बुधवार को होली का पर्व मनाया जाएगा। होली को लेकर कई सारी मान्यताएं समाज में प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक है नई बहु का पहली होली मायके में मनाना।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, लड़की का अपने ससुराल की पहली होली देखना अशुभ माना जाता है। इसके पीछे का एक तर्क तो यह है कि जलती हुई होली अगर सास और बहु एक साथ देख लें तो घर में दरार पैदा होती है। सास और बहु का रिश्ता प्यार के बजाय तकरार की बुनियाद पर टिकता है।
घर में कलह पैदा होती है और व्यक्तिगत संबंध भी बिगड़ जाते हैं। इसके अलावा, एक तर्क ये भी है कि दामाद को भी पहली होली अपनी बीवी के साथ उसके मायके में ही मनानी चाहिए क्योंकि इससे वैवाहिक जीवन में प्यार बढ़ता है। वैवाहिक जीवन सुखमय और संपूर्णता से भरा रहता है।

हालांकि लॉजिकल पॉइंट ऑफ़ व्यू से देखा जाए तो मायके में पहली खेलने का रिवाज इसलिए भी है क्योंकि मायके में लड़की खुद को थोड़ा फ्री महसूस करती है और पति के साथ खुलकर होली खेल पाती है। वहीं, ससुराल में सास, ससुर और अन्य रिश्तेदार होते हैं जिनके सामने झिझक होना सामान्य है।

साथ ही, लड़की के मायके के सभी सदस्यों से दामाद का रिश्ता भी मजबूत होता है। जिस प्रकार की झिझक लड़की ससुराल के लिए महसूस करती है ठीक वैसी ही झिझक लड़के को भी है लड़की के मायके वालों से होती है, ऐसे में मायके में पत्नी के साथ होली खेलने से उसकी ये झिझक भी दूर होती है।
मान्यता है कि मायके में पहली होली खेलने से होने वाली संतान भी हृष्ट-पुष्ट और स्वास्थ्य पैदा होती है। कुछ स्थानों पर ऐसी भी मान्यता है कि न सिर्फ नई दुल्हन बल्कि वो मां जिसे होली के आस-पास बेबी हुआ है उसे भी ससुराल की होली नहीं देखनी चाहिए। इससे बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

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