
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2021
केवल दिवस मनाने से नहीं बल्कि वास्तविक हक और न्याय दिलाने से सशक्त होगी महिलाएं
इन्नोवेस्ट न्यूज़ / 7 मार्च
– एडवोकेट नमिता झा
कल यानी 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। पूरे देश विदेशों में महिलाओं के सम्मान में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, बड़ी बड़ी बातें होंगी, फिर उसके अगले दिन से सब पुराना हो जाएगा। सवाल ये उठता है कि क्या साल में एक बार कार्यक्रम आयोजित करने से महिलाओं को सम्मान और न्याय मिल जाएगा..? क्या हमारे समाज में आज भी महिलाएं सुरक्षित है..? और अगर है तो फिर आए दिन दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, और छेड़खानी की घटनाएं कैसे होती है..? हम सभी महिला सशक्तिकरण की बात करते है परन्तु महिला सशक्तिकरण का अर्थ समान और न्यायपूर्ण समाज के मद्देनजर शिक्षा, रोजगार, निर्णय लेने और बेहतर स्वास्थ्य के साथ महिलाओं को सशक्त बनाना है। महिला सशक्तीकरण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र, शिक्षित और प्रगतिशील बनाने के लिए एक अच्छी सामाजिक स्थिति का आनंद लेने की प्रक्रिया है। दशकों से महिलाएं सामाजिक और पेशेवर रूप से पुरुषों के समकक्ष मान्यता प्राप्त होने के लिए संघर्ष कर रही हैं। एक महिला के व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में कई घटनाएं होती हैं, जहां उसकी क्षमताओं को पुरुष के मुकाबले कमतर आंका जाता है, सभी व्यक्तित्व पर उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और उसकी वृद्धि में बाधा उत्पन्न होती है। महिला सशक्तीकरण के नारे के साथ यह सवाल उठता है कि “महिलाएं वास्तव में मजबूत होती हैं” और “दीर्घकालिक संघर्ष समाप्त हो गया है”। सरकार द्वारा राष्ट्र के विकास में महिलाओं के वास्तविक अधिकारों और मूल्य के बारे में जागरूकता लाने के लिए कई कार्यक्रम लागू किए गए हैं और चलाए जा रहे हैं जैसे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, मातृ दिवस इत्यादि। महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की जरूरत है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा कहा गया सबसे प्रसिद्ध कहावत है “लोगों को जगाने के लिए, यह महिलाओं को जागृत करना चाहिए। एक बार जब वह आगे बढती है तो, परिवार चलता है, गांव चलता है, राष्ट्र चलता है ”। भारत में, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, पहले समाज में महिलाओं के अधिकारों और मूल्यों की हत्या करने वाले सभी राक्षसों को मारने की जरूरत है जैसे कि दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन उत्पीड़न, असमानता, कन्या भ्रूण हत्या, महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा, बलात्कार, वेश्यावृत्ति, अवैध तस्करी और अन्य मुद्दे। आज भी कोर्ट में महिलाओं से जुड़ी कई मामले वर्षो से लंबित है। हर बार न्यालय में बहस होता है और मिलता है न्याय के बदले सिर्फ तारीख पर तारीख। कई ऐसे मामले आज भी लंबित है जो 10 से 20 वर्ष पुराने है। सवाल ये उठता है कि जिस देश मे महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए मुहिम चलाई जाती है ,वहीं महिलाओं के न्याय में इतनी देरी क्यों..? वास्तव में महिलाओं को न्याय तब मिलेगा जब न्यालय द्वारा महिलाओं से जुड़े सभी मुद्दे को जल्द से जल्द निस्तारित कर दिया जाएगा।
पढ़िए , विशेष में ……
डेड स्किन संग जले और दाग धब्बे को दूर करता है हरा मटर
इन्हें भी जानिए – कहानी मुंबई महानगर की , दहेज में किसने किसको दिया था …
सूर्य ग्रह के मकर से कुम्भ राशि में प्रवेश से ये पड़ेगा असर
रोज रात खाये गुड़ , 23 परेशानियों से रहे दृर
ये भी पढ़िए –
फाल्गुन मेला , महिलाओं और बच्चों ने की मस्ती
शहरी सीमा में बंद होगा साइकिल रिक्शा संचालन
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मिशन शक्ति का आयोजन
जब शिव अवतरित हुए ज्योतिर्लिंग स्वरूप में
बाबा विश्वनाथ का होगा झांकी दर्शन, गर्भगृह में प्रवेश की नहीं मिलेगी अनुमति
खबरों को वीडिओ में देखिये –
गरीबी को दरकिनार करते हुए गोल्ड पर कब्ज़ा