धनतेरस – मनाने की वजह ,महत्त्व और पूजा मुहूर्त
इन्नोवेस्ट धर्मनगरी / 12 nav
– भगवती श्रीलक्ष्मी जी की कृपा से धनतेरस पर होगी धनवर्षा
– धनलक्ष्मी के आगमन का पर्व है धनतेरस
– भगवान धन्वन्तरि जी की पूजा-अर्चना से मिलेगा आरोग्य सुख
दीपोत्सव पर्व पर धनतेरस का पावन पर्व काफी हर्ष व उल्लास के साथ मनाने की पौराणिक परम्परा है। धनतेरस से ही दीपावली पर्व का शुभारम्भ हो जाता है। इस बार 13 नवम्बर, शुक्रवार, काॢतक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
कार्तिक मास का त्रयोदशी तिथि 12 नवम्बर, गुरुवार को रात्रि 9 बजकर 30 मिनट पर लगेगी जो कि 13 नवम्बर, शुक्रवार को सायं 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। धनतेरस के दिन आरोग्य के देवता आयुर्वेद शास्त्र के जनक श्री धन्वन्तरि जी का जन्म महोत्सव भी धूम-धाम से मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि समुद्र मन्थन के समय धन्वन्तरि जी अमृत का कलश लेकर अवतरित हुए थे। भगवान धन्वन्तरि जी को आयुर्वेद के प्रवर्तक तथा श्रीविष्णु भगवान के अवतार के रूप में धार्मिक मान्यता प्राप्त है। आज के दिन इनकी पूजा-अर्चना से आरोग्य-सुख तथा उत्तम स्वास्थ्य बना रहता है। कलश की अवधारणा को लेकर नये बर्तन खरीदना शुभकर माना जाता है। बर्तन के अतिरिक्त नवीन व , रजत व स्वर्ण के आभूषण व सोने-चाँदी के सिक्के एवं अन्य मांगलिक वस्तुएँ खरीदना शुभ फलदायी माना गया है। आज के दिन बर्तन खरीदने से अधिक लाभ एवं लक्ष्मी का स्थायी निवास मिलता है। हालांकि बर्तन खरीदने का शास्त्र में कहीं भी उल्लेख नहीं हैं।
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