
सड़क पर नवजात, समाज के लिए बड़ा प्रश्न
इन्नोवेस्ट न्यूज़ / 27 jan
हर दिन कहीं न कही नवजात को सड़कों पर छोड़े जाने का खबर सभी सुनते और पढ़ते है । फेके या छोड़े जाने वाले इन नवजात शिशु में 99% बेटियों की संख्या शुमार होता है वो लड़कियां जिसे माँ कहते है , सृष्टि की रचयिता कहते है । लेकिन क्या ये बेटियां इतनी भारी होती है जिसका वजन असहय होती है ? ” बेटियां क्या वास्तव में परिवार के लिए बोझ है ” , इस प्रश्न का उत्तर अलग अलग जरूर हो सकता है लेकिन सार्वजनिक तौर पर हर कोई इसे न जाने कितने विशेषणों से विभूषित करता है और आदरणीय बताता है। लेकिन सच मानिए ऐसा नहीं है और वो भी आवादी के 60 प्रतिशत हिस्से का कड़वा सच तो यही हैं । मंचो पर लम्बी लम्बी ज्ञान बॉटने वाले आखिर तब मौन क्यों हो जाते है जब सड़क पर नवजात फेका जाता है , छेड़छाड़ की शिकार होने पर ,शादी के दहेज और बाद में ससुराल द्वारा लड़की संग मायके के जीवन को नारकीय बनाते रहने का कलुषित विचार पर ।
ये है मामला
बुधवार की रात उस बिटियां के लिए काली रात ही थी जब उसे जन्म देने वाली मां ने जाने कितने बड़े पत्थर से अपने दूध को दबा कर भोर के अंधियारे में अपने दिल के कलेजे को सड़कों पर छोड़ी होगी । मामला शिवदासपुर के टेलीफोन ऑफिस के पास का है जहां रोने की आवाज सुन पहुंचे राहगीरों ने लावारिश नवजात होने की पहचान बताई । पुलिस पहुंची कार्यवाही के बाद चाइल्ड लाइन के हवाले की ।
इसे क्या कहेंगे…?
बनारस के एक सभ्रांत डॉक्टर के डॉक्टर बिटियां की शादी 9 साल पहले सासाराम के कॉमर्स के प्रोफेसर के डॉक्टर पुत्र से पूरे जोश और उत्साह के साथ सम्पन हुआ । समय आगे बढ़ा और एक और फिर दूसरी बिटियां का जन्म हुआ , जन्म क्या हुआ आफ़त की बाढ़ आ गयी लड़की और मायके पर । कहने को तो बिहार में पूर्ण शराब बंदी है लेकिन हर रोज शराब के नशे में पहले घर में हाथ पैर का प्रयोग फिर सरे बाजार मारपीट । नरक से बढ़ता नारकीय जीवन को जीने को मजबूर अब लड़की अपने ससुराल के बजाय मायके में रहने को मजबूर है और इस झगड़े ने उसके डॉक्टर पिता को मौत से परिचित जरूर कराया । लड़कियों का जन्म इस परिवार को इस कदर परेशान करेगी ये किसी ने नहीं सोचा होगा । ये एक उदाहरण हो सकता है लेकिन सच तो यही है कि ऐसे अनगिनित मामले है जो समाज में शूल की तरह है ।
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